हमनवा 

तकलीफ में हूँ जरा कोई आफताब बुझा दो,                  बुझा दो ये चिराग़ अन्धेरे के वास्ते। किसी दवा से तो ये शराब अच्छी है,लौटा दो मुझे मेरा जाम मेरे सुकून के वास्ते।शख्स बख़ूबी वो लाज़वाब था हर कदम पर,फ़िर भी हुआ नीलाम मोहब्बत के वास्ते।जफ़ा-ए-मोहब्बत में तेरी शिनाख़्त अलग... Continue Reading →

सरहदें

खौफ खाती है हुस्ना मेरी गैर-ए-मुल्क मोहब्बत को, चाँद फिर भी बेख़ौफ़ उस पार जाता क्यों है? बिखर जाती हैं दुवायें उस पार जाते जाते पैगाम-ए-मोहब्बत का हर बार खून से लिखा जाता क्यों है? और पहरा सरहदों पर ये बड़ा बेरहम सा लगता है फिर यादों का काफिला उस पार जाता क्यों है? जब गुनाह नहीं... Continue Reading →

The Journey Within – Part 1

The Sentence There are some incidents in your life that are particularly singular in all their aspects and are placed as a landmark in the long meandering road of your memory. Whenever you have to remember a year or a month or something in particular -a recalling of faith or a turning point- there is some... Continue Reading →

Feel Infinite

Its an early morning and you are standing on the roof with the dark nimbus clouds all over your head. The gentle winds touch your body and refresh it of all the wears and tears and depressions and desperations and all those gloomy things. You sit there without a worry about the colorless future and... Continue Reading →

तन्हाई

इन हैवान अंधेरों को किसने देखा है? इन सुनसान सन्नाटो की आवाज़ किसने सुनी है? मै हर रोज जी जाता हूँ जिनमें, थोडा सा मर जाने के बाद।   ये हताश सुबहों की पहली किरण और वो तन झुलसाती दोपहर किसने देखी है? मै बूंदों सा घुल जाता हूँ जिनमें, थोडा सा बरस जाने के... Continue Reading →

जफ़ा ए इश्क़ 

​मर्ज फरेब है चाहे दवा कुछ भी हो ये इश्क मुसल्सल है चाहे जफ़ा कुछ भी हो ! होती है मेरी हर सुबह शब ढल जाने के बाद अब फर्क किसे है चाहे आफताब कुछ भी हो ! रंजिशे बाकी है कुछ और तो मै हाजिर हूँ तू मत सोच मेरा हाल चाहे कुछ भी... Continue Reading →

Blog at WordPress.com.

Up ↑